वसन्त -कविता -स्वागता बसु -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Swagata Basu

वसन्त -कविता -स्वागता बसु -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Swagata Basu

आज वसंत है ना श्याम
पीले गेंदे की पंखुड़ियों में
हल्की सी सरसराहट है आज
हवा में
एक ख़ुशबू है, न. . .
आज
हवा का रंग स्वेत है
वाग्देवी की अलंकारों की तरह
ये, तुमसे गुज़र कर आई हैं
तभी तो
मुझे छूकर
मेरी रूह को उजाला दे गई
कभी, जब बेखयाल हो
और गुलाबी हवा
तुम्हारे बालों को सहलाये
तुम भी छू लेने उसे
अपनी सांसो से
वो मेरे दिल को छूकर
मेरा अहसास लाई है
मैं भी महसूस करूँगी
तुम्हारी यादों की सरगोशियों को।।

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