वरत न रहउ न मह रमदाना-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

वरत न रहउ न मह रमदाना-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

वरत न रहउ न मह रमदाना ॥
तिसु सेवी जो रखै निदाना ॥१॥
एकु गुसाई अलहु मेरा ॥
हिंदू तुरक दुहां नेबेरा ॥१॥ रहाउ ॥
हज काबै जाउ न तीरथ पूजा ॥
एको सेवी अवरु न दूजा ॥२॥
पूजा करउ न निवाज गुजारउ ॥
एक निरंकार ले रिदै नमसकारउ ॥३॥
ना हम हिंदू न मुसलमान ॥
अलह राम के पिंडु परान ॥४॥
कहु कबीर इहु कीआ वखाना ॥
गुर पीर मिलि खुदि खसमु पछाना ॥5॥3॥1136॥

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