वफ़ा के बाब में इल्ज़ामे-आशिक़ी न लिया-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

वफ़ा के बाब में इल्ज़ामे-आशिक़ी न लिया-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

वफ़ा के बाब में इल्ज़ामे-आशिक़ी न लिया
कि तेरी बात की और तेरा नाम भी न लिया

ख़ुशा वो लोग कि महरूमे-इल्तिफ़ात रहे
तिरे करम को ब-अंदाज़े-सादगी न लिया

तुम्हारे बाद कई हाथ दिल की सम्त बढ़े
हज़ार शुक्र गिरेबाँ को हमने सी न लिया

तमाम मस्ती-ओ-तिश्नालबी के हंगामे
किसी ने संग उठाया किसी ने मीना लिया

‘फ़राज़’ ज़ुल्म है इतनी ख़ुद एतमादी भी
कि रात भी थी अँधेरी चराग़ भी न लिया

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