वफ़ा-ए-वा’दः नहीं, वा’दः-ए-दिगर भी नहीं-नक़्शे फ़रियादी-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz

वफ़ा-ए-वा’दः नहीं, वा’दः-ए-दिगर भी नहीं-नक़्शे फ़रियादी-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz

वफ़ा-ए-वा’दः नहीं, वा’दः-ए-दिगर भी नहीं
वो मुझसे रूठे तो थे, लेकिन इस क़दर भी नहीं

बरस रही है हरीमे-हवस मे दौलते-हुस्न
गदा-ए-इश्क़ के कासे मे इक नज़र भी नहीं

न जाने किसलिए उम्मीदवार बैठा हूँ
इक ऐसी राह पे जो तेरी रहगुज़र भी नहीं

निगाहे-शौक़ सरे-बज़्म बे-हिजाब न हो
वो बे-ख़बर ही सही, इतने बे-ख़बर भी नहीं

ये अ’हदे-तर्क़े-मोहब्बत है किसलिये आख़िर
सुकूने-क़ल्ब इधर भी नहीं, उधर भी नहीं

 

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