लोह पुरुष सरदार पटेल- कविता-Rajshekhar -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajshekhar 

लोह पुरुष सरदार पटेल- कविता-Rajshekhar -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajshekhar

इस आजाद देश में, कहने की तो बात नहीं,
सरदार पटेल ने ही, एकता की का कमान संभारी है ।
तब जाकर यह देश कहीं दुश्मनों पर भारी है ।
आज यह एकत्र भारत लोह पुरुष का कण -कण आभारी है ।

भिन्नता में अभिन्नता क्या है,बताया जिसने,
अनेकता में एकता का अर्थ, समझाया जिसने ,
जिसने समझाया हमको, अभिन्न रहना ही समझदारी है ।
आज यह एकत्र भारत लोह पुरुष का कण -कण आभारी है ।

हिंदू मुस्लिम एक किए,सिख ईसाई भी अभिन्न किए।
रंगभेद, जाती-पाती इन सबको को दूर किए।
देश की एकता ना टूटे, अब यह बस अपनी जिम्मेदारी है ।
आज यह एकत्र भारत लोह पुरुष का कण -कण आभारी है ।

कहीं राम कहे कोई, कहीं रहीम पुकारे हैं ।
अंग्रेज चाहे दूर रहें फिर भी, यहां भाई पर भाई की चलती हर पल तलवारे हैं ।
भारत को जिसने एकजुट किया और दूर करिए बीमारी है ।
आज यह एकत्र भारत लोह पुरुष का कण -कण आभारी है ।

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