लोग कहते हैं इश्क़ छोड़ !-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

लोग कहते हैं इश्क़ छोड़ !-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

लोग कहते हैं इश्क़ छोड़ वर्ना बदनाम हो जायेगा
कैसे समझायें यूँ ही सही अपना नाम हो जायेगा !

हर ख़ुशी से वाबस्ता हो, पहुंचो हर एक उरूज तक
अपना तो क्या, वही क़िस्सा है, तमाम हो जायेगा !

यह कश्मकश ज़िन्दगी की उसी के साथ ख़त्म होगी
थक चुके दिलो-दिमाग़ को ज़रा आराम हो जायेगा !

तअ’ल्लुक़ हमारे बीच गर ऐसे ही ना-ख़ुशगवार रहे
ज़िन्दगी तो मुश्किल थी ही मरना हराम हो जायेगा !

कभी दुआओं में ही सही तुम याद रख सके अगर
अपने लिए तो बस यह भी एक इनाम हो जायेगा !

हमारे रास्ते और ख़्यालात जो एक हो सके कभी
किसी रोज़ तुम्हारे साथ भी एक जाम हो जायेगा !

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