…… (लोकतन्त्र के इस अमानवीय)-सुदामा पाण्डे का प्रजातंत्र-सुदामा पांडेय धूमिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sudama Panday Dhoomil

…… (लोकतन्त्र के इस अमानवीय)-सुदामा पाण्डे का प्रजातंत्र-सुदामा पांडेय धूमिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sudama Panday Dhoomil

“लोकतन्त्र के
इस अमानवीय संकट के समय
कविताओं के ज़रिए
मैं भारतीय
वामपंथ के चरित्र को
भ्रष्ट होने से बचा सकूंगा ।” एकमात्र इसी विचार
से मैं रचना करता हूँ अन्यथा यह इतना दुस्साध्य
और कष्टप्रद है कि कोई भी व्यक्ति
अकेला होकर मरना पसन्द करेगा
बनिस्बत इसमें आकर
एक सार्वजनिक और क्रमिक
मौत पाने के ।

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