लैंडस्केप-शैलेन्द्र चौहान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shailendra Chauhan

लैंडस्केप-शैलेन्द्र चौहान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shailendra Chauhan

 

हाशिये पर
लिखे शब्द
अचानक
उछलकर
हो गए हैं बाहर
पृष्ठ से

कैनवास
सांध्य बेला की तरह
है उदास

छिटक गए हैं रंग
लैंडस्केप पर
बेढंगे

फिर भी नहीं है
कहीं कुछ
अप्राकृतिक
अस्वाभाविक |

 

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