लाठी में हैं गुण बहुत, सदा रखिये संग- (लोक-नीति)-कुण्डलियाँ -गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai

लाठी में हैं गुण बहुत, सदा रखिये संग- (लोक-नीति)-कुण्डलियाँ -गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai

लाठी में हैं गुण बहुत, सदा रखिये संग ।
गहरि नदी, नाली जहाँ, तहाँ बचावै अंग ।।

तहाँ बचावै अंग, झपटि कुत्ता कहँ मारे ।
दुश्मन दावागीर होय, तिनहूँ को झारै ।।

कह गिरिधर कविराय, सुनो हे दूर के बाठी ।
सब हथियार छाँडि, हाथ महँ लीजै लाठी ।।

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