लम्हा-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

लम्हा-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

साया जब भी ढलता है
कुछ न कुछ बदलता है
लम्हा एक लर्ज़िश है
इक बसीत जुम्बिश है
जैसे होंट मिलते हैं
जैसे फूल खिलते हैं
जैसे नूर बढ़ता है
जैसे नश्शा चढ़ता है

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