रोज़ की तरह-प्यार के सौजन्य से-परिवेश : हम-तुम-कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan 

रोज़ की तरह-प्यार के सौजन्य से-परिवेश : हम-तुम-कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan

अशान्ति, धुआँ और बेबसी :
सिगरेट पीता हुआ आसमान,
उमड़ते बादलों के धुआँधार छल्ले
बेज़बान।
लाल, काले, नीले रंग घुले-मिले
तेज़ शराब की तरह
मेज़ पर लुढ़की हुई शाम में
धीरे-धीरे डूब गया दिन
औँधे मुँह
रात गए
कन्धे पर लाद
कोई कमरे में डाल गया
रोज़ की तरह
आज भी!

Leave a Reply