रैणि दिनसु दुइ सदे पए-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

रैणि दिनसु दुइ सदे पए-गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

रैणि दिनसु दुइ सदे पए ॥
मन हरि सिमरहु अंति सदा रखि लए ॥१॥
हरि हरि चेति सदा मन मेरे ॥
सभु आलसु दूख भंजि प्रभु पाइआ गुरमति गावहु गुण प्रभ केरे ॥१॥ रहाउ ॥
मनमुख फिरि फिरि हउमै मुए ॥
कालि दैति संघारे जम पुरि गए ॥२॥
गुरमुखि हरि हरि हरि लिव लागे ॥
जनम मरण दोऊ दुख भागे ॥३॥
भगत जना कउ हरि किरपा धारी ॥
गुरु नानकु तुठा मिलिआ बनवारी ॥੪॥੨॥੧੧੭੭॥

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