रे चित चेतसि की न दयाल दमोदर बिबहि न जानसि कोई शब्द ,भक्त धन्ना जी, Hindi Poetry,हिंदी कविता ,Hindi Poem , Hindi Kavita, Bhakt Dhanna Ji,

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रे चित चेतसि की न दयाल दमोदर बिबहि न जानसि कोई ॥
जे धावहि ब्रहमंड खंड कउ करता करै सु होई ॥१॥ रहाउ ॥
जननी केरे उदर उदक महि पिंडु कीआ दस दुआरा ॥
देइ अहारु अगनि महि राखै ऐसा खसमु हमारा ॥१॥
कुमी जल माहि तन तिसु बाहरि पंख खीरु तिन नाही ॥
पूरन परमानंद मनोहर समझि देखु मन माही ॥२॥
पाखणि कीटु गुपतु होइ रहता ता चो मारगु नाही ॥
कहै धंना पूरन ताहू को मत रे जीअ डरांही ॥३॥३॥੪੮੮॥

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