रेखाएँ-लहर पुकारे -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

रेखाएँ-लहर पुकारे -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

तट से ही कुछ दूर डूबती
जगजीवन की नैया,
विवश पार की की देखता,
माँझी नाव – खिवैया!

सरिता के सूने तट पर
शशि की किरणें मुसकातीं,
पर मानव की इच्छाएँ-
यह देख नहीं क्यों पातीं,

सागर के वक्ष:स्थल पर
अस्थिर बुद् बुद् जग सारा
अवसानमयी रेखाएँ
पा लेतीं पूर्ण किनारा ।

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