रूप चमूय सज्यौ दल देखि भज्यौ-सुजानहित -घनानंद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ghananand 

रूप चमूय सज्यौ दल देखि भज्यौ-सुजानहित -घनानंद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ghananand

रूप चमूय सज्यौ दल देखि भज्यौ तजि देसहि धीर मवासी।
नैन मिले उरके पुर पैठते बाज लुटी न छुटी तिनका सी।
प्रेम दुहाई फिरी घन आनंद बांधि लिये कुलनेम गुढ़ासी।
रीझ सुजान सची पटरानी बची बुधि बापरी है कर दासी।

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