रुक्ख झूम पए याद दे आए बुल्ले-कर्मजीत सिंह गठवाला -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karamjit Singh Gathwala ,

रुक्ख झूम पए याद दे आए बुल्ले-कर्मजीत सिंह गठवाला -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karamjit Singh Gathwala ,

रुक्ख झूम पए याद दे आए बुल्ले,
खिड़े फुल्ल ते भौरां गुंजार पाई ।
नाल पत्त्यां चिमटके बैठ गए सन,
कतरे शबनमी आ फुहार पाई ।
दूरों ‘वाज़ पई तेरे नां वाली,
असीं समझ गए मुड़ बहार आई ।
इक्क उड्ड पत्ती आई तेरे वल्लों,
चुक्क वेख्या हो तार तार आई ।

तेरे लई लिखके मैं तां रक्ख लई सी,
चिट्ठी उड्ड गई हवा दे नाल किधरे ।
तेरे लई संभाल के रक्ख लए सन,
उड्ड गए ने मेरे ख़्याल किधरे ।

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