राह खोजेंगे-आवाज़ों के घेरे -दुष्यंत कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dushyant Kumar

राह खोजेंगे-आवाज़ों के घेरे -दुष्यंत कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dushyant Kumar

ये कराहें बन्द कर दो
बालकों को चुप कराओ
सब अंधेरे में सिमट आओ यहाँ नतशीश
हम यहाँ से राह खोजेंगे ।

हम पराजित हैं मगर लज्जित नहीं हैं
हमें खुद पर नहीं
उन पर हँसी आती है
हम निहत्थों को जिन्होंने हराया
अंधेरे व्यक्तिव को अन्धी गुफ़ाओं में
रोशनी का आसरा देकर
बड़ी आयोजना के साथ पहुँचाया
और अपने ही घरों में कैद करके कहा :
“लो तुम्हें आज़ाद करते हैं ।”

आह !
वातावरण में वेहद घुटन है
सब अंधेरे में सिमट आओ
और सट जाओ
और जितने जा सको उतने निकट आओ
हम यहाँ से राह खोजेंगे ।

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