रास्ते पर-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

रास्ते पर-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

रास्ते पर चलते–चलते
भीड़ में जलते-जलते
अकेले हो जाने पर
हम राख हो जायेंगे

और अगर
कोई साख चाहेगा
तो हम इस तरह
अपनी राख से
अपने शानदार ज़माने की
साख हो जायेंगे

 

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