राम तुही, तुहि कृष्ण है, तुहि देवन को देव-ज्ञान-वैराग्य कुण्डलियाँ-गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai 

राम तुही, तुहि कृष्ण है, तुहि देवन को देव-ज्ञान-वैराग्य कुण्डलियाँ-गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai

राम तुही, तुहि कृष्ण है, तुहि देवन को देव ।
तू ब्रह्मा, शिव शांति तू, तुहि सेवक, तुहि सेव॥
तुहि सेवक, तुहि सेव, तुही इंदर तुही शेषा ।
तुही होय सब रूप, कियो सबमें परवेसा ॥
कह गिरिधर कविराय, पुरुष तुहि, तुहि वामा ।
तुहि लछमन, तुहि भरत, शत्रुघन, सीतारामा॥

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