राम का घर है बनता-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

राम का घर है बनता-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

(अयोध्या पर आधारित एक कविता)
राम का घर है बनता, जो सबके दिल में बसता।
हमे तो एक दिन अब कल्प सा है लगता।।

स्वर्ग में हलचल ब्रह्मा भी आयेंगे।
अयोध्या में जो हनुमत साक्षी बन जायेंगे।
शिव भी कैलास से देख रहे सब कुछ,
प्रयागराज आके यहां शीश झुकायेंगे।।

गंधर्व भी है नाचते, शिव का डमरू बजता।
राम का घर है बनता जो सबके दिल में बसता।।

आसमां में देखना तो इन्द्र खड़े होंगे।
आस्था से दिलों में तो बिंदु बने होंगे।
मां सरस्वती के वीणा से तान निकलेगी।
तीर्थो का जल लिए तो सिंधु खड़े होंगे।।

हमे तो अपने राम का नाम ही है जचता।
राम का घर है बनता जो सबके दिल में बसता।।

सिर पर सियाराम का नाम लिखा होगा।
केसरिया सीने पर राम लिखा होगा।
अयोध्या केसरिया रंग में रंग जायेगी।
राम राम राम राम, राम लिखा होगा।।

चौदह भुवनो में राम का नाम बसता‌।
राम का घर है बनता जो सबके दिल में बसता।।

 

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