रात तीन बजे-किवाड़ _कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

रात तीन बजे-किवाड़ _कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

 

एक आवाज़ आती है
रात तीन बजे की नींद में

यह कुएँ में बाल्टी डूबने की आवाज़ है
या बिल्ली कूद गई है बगल की छत पर
कि एक औरत ने
अपना रोना तेज़ी से रोक लिया है
यह किसी पत्थर के गिरने की आवाज़ है
या एक बीमार की कराह
कि रात में पत्ता इसी तरह टूटता है?

यह नेपाली चौकीदार के डंडे की
दीवार पर फटकार की आवाज़ है
या शाम से आम के पत्तों में छिपा
घर से भागा-रूठा लड़का
मौका देखकर कूदा है माँ की गोद के लिए
या फिर किसी ने
डुबकी लगाई है तालाब में
यह गोली की आवाज़ है
या आदमी के धूल में गिर जाने की?

यह कैसी आवाज़ है
जो आई है जब से
मेरी नींद की छाती पर बैठ गई है!

1988

 

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