रात और दिन का फ़ासला हूँ मैं-ग़ज़लें-कुमार विश्वास-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Vishwas 

रात और दिन का फ़ासला हूँ मैं-ग़ज़लें-कुमार विश्वास-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Vishwas

रात और दिन का फ़ासला हूँ मैं
ख़ुद से कब से नहीं मिला हूँ मैं

ख़ुद भी शामिल नहीं सफ़र में पर
लोग कहते हैं क़ाफ़िला हूँ मैं

ऐ मोहब्बत तिरी अदालत में
एक शिकवा हूँ इक गिला हूँ मैं

मिलते रहिए कि मिलते रहने से
मिलते रहने का सिलसिला हूँ मैं

फूल हूँ ज़िंदगी के गुलशन का
मौत की डाल पर खिला हूँ मैं

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