राग जात रागी जानै, बैरागै बैरागी जानै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

राग जात रागी जानै, बैरागै बैरागी जानै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

राग जात रागी जानै, बैरागै बैरागी जानै
त्यागह त्यागी जानै, दीन दया दान है ।
जोग जुगत जोगी जानै, भोगरस भोगी जानै
रोग दोख रोगी जानै प्रगट बखान है ।
फूल राख माली जानै, पानह तम्बोली जानै
सकल सुगंधिगति गांधी जानउ जान है ।
रतनै जउहारी जानै, बेहारै ब्युहारी जानै
आतम प्रीख्या कोऊ बिबेकी पहचान है ॥६७५॥

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