रागु सोरठि-गुरू गोबिन्द सिंह जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Gobind Singh Ji 

रागु सोरठि-गुरू गोबिन्द सिंह जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Gobind Singh Ji

प्रभजू तोकहि लाज हमारी ॥
नलि कंठ नरहरि नाराइण नील बसन बनवारी ॥१॥रहाउ ॥
परम पुरख परमेश्वर सुआमी पावन पउन अहारी ॥
माधव महा जोति मधु मरदन मान मुकंद मुरारी ॥१॥
निरबिकार निरजुर निंद्राबिनु निरबिख नरक निवारी ॥
क्रिपासिंध काल त्रै दरसी कुक्रित प्रनासनकारी ॥२॥
धनुरपान ध्रित मान धराधर अनि बिकार असि धारी ॥
हौ मति मंद चरन शरनागति करि गहि लेहु उबारी ॥३॥१॥

This Post Has One Comment

Leave a Reply