रस आरस सोय उठी कछु भोय लगी-सुजानहित -घनानंद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ghananand 

रस आरस सोय उठी कछु भोय लगी-सुजानहित -घनानंद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ghananand

रस आरस सोय उठी कछु भोय लगी लसैं पीक पगी पलकैं,
घन आनंद ओप बढ़ी मुख और सुझेलि फबीं सुथरी अलकैं।
अंग राति जम्हाति लजाति लखैं, अंग-अंग अनंग दिपैं झलकें।
अपरानि में आधियैं बात धरैं लड़कानि की आनि परी छलकैं।

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