रजस्वला मैदान पार करके तुम-असमिया कविता-नीलमणि फूकन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nilmani Phookan

रजस्वला मैदान पार करके तुम-असमिया कविता-नीलमणि फूकन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nilmani Phookan

 

रजस्वला मैदान पार करके शायद अब तुम
बहुत दूर पहुँच गई हो।
पिंजरे में बंद है तुम्हारी वो चीख
किसानों के बीच किसी बात को लेकर
कोहराम है।
और अभी-अभी जैसे कुछ घट गया
खिले हुए गुलाब के फूलों में
चकित करने वाली निस्तब्धता है।

 

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