रंग में रंग दई बांह पकर के-घासीराम-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ghasiram

रंग में रंग दई बांह पकर के-घासीराम-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ghasiram

रंग में रंग दई बांह पकर के लाजन मर गई होरी में
इकली भाज दई होरी में हुरमत लाज गई होरी में
चटक दार चोली में सरवट पर गई होरी में
चूनर रंग बोरी होरी में पिचकारी मारी होरी में
ह्वै के श्याम निशंक अंक भुज भर लई होरी में
गाल गुलाल मल्यो होरी में मोतिन लर तोरी होरी में
लोक लाज खूंटी पै कान्हा धर दइ होरी में
बरजोरी कीन्ही होरी में ऎसी बुरी भई होरी में
घासीराम पीर सब तन की हर लइ होरी में

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