ये ख़ून मेरा नहीं है-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

ये ख़ून मेरा नहीं है-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

तुम्हारी आँखों में
आज किसके लहू की लाली
चमक रही है
ये आग कैसी दहक रही है
पता नहीं
तुमने मेरे धोके में किस पे ख़ंजर चला दिया है
वो कौन था
किसके रास्ते का चराग़ तुमने बुझा दिया है
ये ख़ून मेरा नहीं है
लेकिन तुम्हें भी शायद ख़बर नहीं थी
जहाँ निशाना लगाये बैठे थे
वो मेरी रहगुज़र नहीं थी

मैं कल भी ज़िन्दा था…
आज भी हूँ
मैं कोई चेहरा
कोई इमारत
कोई इलाका नहीं हूँ
सूरज की रौशनी हूँ
मैं ज़िन्दगी हूँ।

तुम्हारे हथियार बेनज़र हैं
तबील सदियों का फ़ासला
वक़्त बन चुका है

तलाश तुमको है जिसकी
वो अब
तुम्हारे अन्दर समा चुका है

तुम्हारी-मेरी ये दुश्मनी भी है
इक मुअम्मा
ख़ुद अपने घर को न आग जब तक
लगाओगे तुम
मुझे नहीं मार पाओगे तुम।

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