ये साधक-कहें केदार खरी खरी-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

ये साधक-कहें केदार खरी खरी-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

 

ठाट-बाट के सुविधा-भोगी
ये साधक-आराधक धन के
निहित स्वार्थ में लीन निरंतर
बने हुए हैं बाधक जन के
केंद्र-बिंदु पर बैठे-ठहरे
चक्र चलाते हैं शोषण के

रचनाकाल: ०६-१०-१९७६

 

Leave a Reply