ये मौत-ओ-अदम कौन-ओ-मकाँ और ही कुछ है-कविता -फ़िराक़ गोरखपुरी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Firaq Gorakhpuri

ये मौत-ओ-अदम कौन-ओ-मकाँ और ही कुछ है-कविता -फ़िराक़ गोरखपुरी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Firaq Gorakhpuri

ये मौत-ओ-अदम कौन-ओ-मकाँ और ही कुछ है
सुन ले कि मिरा नाम-ओ-निशाँ और ही कुछ है

इतना तो यक़ीं है कि वही हैं तिरी आँखें
इस पर भी मगर वहम-ओ-गुमाँ और ही कुछ है

इक कैफ़ियत-ए-राज़ है ग़म है न मसर्रत
इस बज़्म-ए-मोहब्बत में समाँ और ही कुछ है

या दर्द के नग़्मों में वही है तिरी आवाज़
या पर्दा-ए-साज़-ए-रग-ए-जाँ और ही कुछ है

अच्छे हैं जहाँ हैं मगर ऐ दामन-ए-जानाँ
पाते हैं जो तुझ में वो अमाँ और ही कुछ है

शाइर हैं ‘फ़िराक़’ और भी इस दौर में लेकिन
ये रंग-ए-बयाँ रंग-ए-ज़बाँ और ही कुछ है

Leave a Reply