येह आई वुह पहुंची वुह गई-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

येह आई वुह पहुंची वुह गई-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

येह आई वुह पहुंची वुह गई, सन से निकल कर ।
जब बैठ गई सर पि उठी तन से निकल कर ।
दो कर गई चार आई न जोशन से निकल कर ।
तर्रारी में तेज़ी में थी नागन से निकल कर ।
दुश्मन को लिया मरकब-ए-दुश्मन भी न छोड़ा ।
असवार को दो कर गई तौसन भी न छोड़ा ।

This Post Has One Comment

Leave a Reply