यूं ही चला चल राही-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

यूं ही चला चल राही-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

यूं ही चला चल राही
कितनी हसीन है ये दुनिया
भूल सारे झमेले, देख फूलों के मेले
बड़ी रंगीन है ये दुनिया

ये रास्ता है कह रहा अब मुझसे
मिलने को है कोई कहीं अब तुझसे
दिल को है क्यों बेताबी
किससे मुलाक़ात होनी है
जिसका कबसे अरमां था
शायद वही बात होनी है

यूं ही चला चल राही
जीवन गाड़ी है समय पहिया
आंसू की नदिया भी है
खुशियों की बगिया भी है
रस्ता सब तेरा तके भैया

देखूं जिधर भी इन राहों में
रंग पिघलते हैं निगाहों में
ठंडी हवा है ठंडी छांव है
दूर वो जाने किसका गांव है
बादल ये कैसा छाया
दिल ये कहां ले आया
सपना ये क्या दिखलाया है मुझको
हर सपना सच लगे, जो प्रेम अगन जले
जो राह तू चले अपने मन की
हर पल की सीप से मोती ही तू चुने
जो सदा तू सुने अपने मन की

मन अपने को कुछ ऐसे हल्का पाए
जैसे कन्धों पे रखा बोझ हट जाए
जैसे भोला सा बचपन फिरसे आये
जैसे बरसों में कोई गंगा नहाए
खुल सा गया है ये मन
खुल सा गया हर बंधन
जीवन अब लगता है पावन मुझको
जीवन में प्रीत है, होठों पे गीत है
बस ये ही जीत है सुन ले राही
तू जिस दिशा भी जा, तू प्यार ही लूटा
तू दीप ही जला, सुन ले राही

यूं ही चला, चल राही
कौन ये मुझको पुकारे
नदियां पहाड़ झील और झरने, जंगल और वादी
इनमें है किसके इशारे

(स्वदेस)

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