युगलानंद -पवित्र पर्व -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

युगलानंद -पवित्र पर्व -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

मैंने मला गुलाल, उन्होंने मूठ चलाई,
मैं मूठी में हुई, उन्होंने आँख बचाई।
मैंने छिड़का रंग, उन्होंने ली पिचकारी,
मैं रस-बस हो गयी, बने वे रसिक विहारी।
मैं अबीर ले बढ़ी, कुमकुमे उनके टूटे;
मैं नव बेली बनी, वे बने विलसित बूटे।
मेरी ताली बजी, उन्होंने गाई होली;
मैं विहँसी मुख मोड़, उन्होंने बोली बोली।
मैंने छेड़ी बीन, उन्होंने वेणु बजाया;
मेरी रंगत रही, उन्होंने रंग दिखाया।
मैं उमंग में भरी, कलेजा उनका उछला,
मेरी भौंहें तनीं, उन्होंने तेवर बदला।
मैंने छीनी पाग, उन्होंने घूँघट टाला;
मैंने टोना किया, उन्होंने जादू डाला।
मैं स्नेह में सनी, बने वे प्रेम-बसेरे;
मैं मोहन की हुई, हुए मन मोहन मेरे।

Leave a Reply