याद आता है सुना था पहले-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

याद आता है सुना था पहले-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

याद आता है सुना था पहले
कोई अपना भी ख़ुदा था पहले

मैं वो मक़तूल जो क़ातिल न बना
हाथ मेरा भी उठा था पहले

जिस्म बनने में उसे देर लगी
इक उजाला-सा हुआ था पहले

फूल जो बाग़ की ज़ीनत ठहरा
मेरी आँखों में खिला था पहले

आसमाँ, खेत, समन्दर सब लाल
खून काग़ज़ पे उगा था पहले

शहर तो बाद में वीरान हुआ
मेरा घर ख़ाक हुआ था पहले

अब किसी से भी शिकायत न रही
जाने किस-किस से गिला था पहले

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