यह मनु नैक न कहिओ करै- शब्द-रागु देवगंधारी महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

यह मनु नैक न कहिओ करै- शब्द-रागु देवगंधारी महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

यह मनु नैक न कहिओ करै ॥
सीख सिखाइ रहिओ अपनी सी दुरमति ते न टरै ॥1॥रहाउ॥
मदि माइआ कै भइओ बावरो हरि जसु नहि उचरै ॥
करि परपंचु जगत कउ डहकै अपनो उदरु भरै ॥1॥
सुआन पूछ जिउ होइ न सूधो कहिओ न कानधरै ॥
कहु नानक भजु रामनाम नित जा ते काजु सरै ॥2॥1॥536॥

Leave a Reply