यह फागुनी हवा-फणीश्वर नाथ ‘रेणु’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Phanishwar Nath Renu

यह फागुनी हवा-फणीश्वर नाथ ‘रेणु’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Phanishwar Nath Renu

यह फागुनी हवा
मेरे दर्द की दवा
ले आई…ई…ई…ई
मेरे दर्द की दवा!

आंगन ऽ बोले कागा
पिछवाड़े कूकती कोयलिया
मुझे दिल से दुआ देती आई
कारी कोयलिया-या
मेरे दर्द की दवा
ले के आई-ई-दर्द की दवा!

वन-वन
गुन-गुन
बोले भौंरा
मेरे अंग-अंग झनन
बोले मृदंग मन–
मीठी मुरलिया!
यह फागुनी हवा
मेरे दर्द की दवा ले के आई
कारी कोयलिया!
अग-जग अंगड़ाई लेकर जागा
भागा भय-भरम का भूत
दूत नूतन युग का आया
गाता गीत नित्य नया
यह फागुनी हवा…!
(रचनाकाल: 1956 तथा ‘सारिका’ के
1 अप्रैल 1979 के अंक में प्रकाशित)

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