यह नुस्ख़ा भी कुछ आज़माना पड़ेगा-ग़ज़लें-ख़याल लद्दाखी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Khayal Ladakhi

यह नुस्ख़ा भी कुछ आज़माना पड़ेगा-ग़ज़लें-ख़याल लद्दाखी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Khayal Ladakhi

यह नुस्ख़ा भी कुछ आज़माना पड़ेगा
संभलने को कुछ लडखडाना पड़ेगा

दिल ए ज़ार की आज़माइश को फिर से
किसी संग से दिल लगाना पड़ेगा

बस इक बार सजदा किया मैकदे को
ख़बर क्या थी पीछे ज़माना पड़ेगा

जो भूले तरीक़ ए अदावत उन्हीं को
सबक़ इशक़ का फिर सिखाना पड़ेगा
ज़रूरत है वक़्त ए रवाँ की तो चलिए
ख़राबों को फिर आना जाना पड़ेगा

कहीं दफ़्न कर दे न मुझको ज़माना
मैं ज़िन्दा हूँ सब को बताना पड़ेगा

बहुत सह लिया अहद ए नासाज़ मैं ने
अब अपना कलेजा दिखाना पड़ेगा

सहल कब हैं जादे ख़याल इस जहाँ के
गिराँ राह हैं डगमगाना पड़ेगा

Leave a Reply