मौत बस एक छाँव है।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

मौत बस एक छाँव है।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

सृष्टि एक जीवन्त हलचल
चल रही अविराम पल -पल,
हर तरफ, हरदम सृजन है
या धरित्री या गगन है।
अश्रु में क्यों गाँव है?
मौत बस एक छाँव है।

बीज की औकात देखो-
पुष्प, डाली, पात देखो,
सर्जना के रंग सारे –
मृत्यु, जीवन, चंद्र, तारे।
काँपता क्यों पाँव है?
मौत बस एक छाँव है।

मृत्यु है तो रूप नूतन
चेतना पाती नया तन,
वृक्ष झड़ते आस में
नव दलों की प्यास में।
डर डुबोता नाव है।
मौत बस एक छाँव है।

 

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