मोहु कुट्मबु मोहु सभ कार-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

मोहु कुट्मबु मोहु सभ कार-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

मोहु कुट्मबु मोहु सभ कार ॥
मोहु तुम तजहु सगल वेकार ॥१॥
मोहु अरु भरमु तजहु तुम्ह बीर ॥
साचु नामु रिदे रवै सरीर ॥१॥ रहाउ ॥
सचु नामु जा नव निधि पाई ॥
रोवै पूतु न कलपै माई ॥२॥
एतु मोहि डूबा संसारु ॥
गुरमुखि कोई उतरै पारि ॥३॥
एतु मोहि फिरि जूनी पाहि ॥
मोहे लागा जम पुरि जाहि ॥४॥
गुर दीखिआ ले जपु तपु कमाहि ॥
ना मोहु तूटै ना थाइ पाहि ॥५॥
नदरि करे ता एहु मोहु जाइ ॥
नानक हरि सिउ रहै समाइ ॥६॥२३॥(356)॥

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