मोनताज-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar 

मोनताज-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

नींद के बादलों के पीछे है
मुस्कुराता हुआ कोई चेहरा
चेहरे पे बिखरी एक रेशमी लट
सरसराता हुआ कोई आँचल
और दो आँखें हैराँ-हैराँ-सी

इक मुलाक़ात
इक हसीं लम्हा
झील का ठहरा-ठहरा-सा पानी
पेड़ पर चहचहाती इक चिड़िया
घास पर खिलते नन्हे-नन्हे फूल
ख़ूबसूरत लबों पे नर्म-सी बात

दोपहर एक पीली-पीली-सी
बर्फ़-सी ठंडक एक लहजे में
टूटा आईना
उड़ते कुछ कागज़
मुन्हदिम पुल
अधूरी एक सड़क
किरचों-किरचों बिखरता इक मंज़र
पलकों पर झिलमिलाता एक आँसू
गहरा सन्नाटा शोर करता हुआ
नींद के बादलों के पीछे है।

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