मैला ब्रहमा मैला इंदु-शब्द-कबीर जी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kabir Ji

मैला ब्रहमा मैला इंदु-शब्द-कबीर जी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kabir Ji

मैला ब्रहमा मैला इंदु ॥
रवि मैला मैला है चंदु ॥१॥
मैला मलता इहु संसारु ॥
इकु हरि निरमलु जा का अंतु न पारु ॥१॥ रहाउ॥
मैले ब्रहमंडाइ कै ईस ॥
मैले निसि बासुर दिन तीस ॥२॥
मैला मोती मैला हीरु ॥
मैला पउनु पावकु अरु नीरु ॥३॥
मैले सिव संकरा महेस ॥
मैले सिध साधिक अरु भेख ॥४॥
मैले जोगी जंगम जटा सहेति ॥
मैली काइआ हंस समेति ॥५॥
कहि कबीर ते जन परवान ॥
निरमल ते जो रामहि जान ॥६॥३॥1158॥

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