मैदां में अद्दू मेरी हवा-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

मैदां में अद्दू मेरी हवा-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

मैदां में अद्दू मेरी हवा को नहीं पहुंचा ।
शबदोज़-ए-सुख़न के सुमे-पा को नहीं पहुंचा ।
ता अर्श गया तब-ए-रसा को नहीं पहुंचा ।
बन्दा कोई जिस तरह ख़ुदा को नहीं पहुंचा ।
ख़ामा तो नहीं हाथ में मूसा का असा है ।
फ़रऊन-ए-अद्दू की मेरी मुट्ठी में कज़ा है ।

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