मैं वह धनु हूँ-इत्यलम् अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

मैं वह धनु हूँ-इत्यलम् अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

मैं वह धनु हूँ, जिसे साधने
में प्रत्यंचा टूट गई है।
स्खलित हुआ है बाण, यदपि ध्वनि
दिग्दिगन्त में फूट गई है–
प्रलय-स्वर है वह, या है बस
मेरी लज्जाजनक पराजय,
या कि सफलता! कौन कहेगा
क्या उस में है विधि का आशय!
क्या मेरे कर्मों का संचय
मुझ को चिन्ता छूट गई है–
मैं बस जानूँ, मैं धनु हूँ, जिस
की प्रत्यंचा टूट गई है!

लाहौर, 15 जून, 1935

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