मैं यहाँ हूँ:-आर्फ़ेउस- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

मैं यहाँ हूँ:-आर्फ़ेउस- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

मैं यहाँ हूँ:
मेरा संगीत
यहाँ नहीं है।
वह देहरी है: मुक्ति की देहरी है
प्रकाशमान।
और मेरा संगीत प्रकाश है
जो तुम्हें अभिषिक्त करता है
तुम में प्राण डालता है
वहीं जहाँ तुम हो:
मेरा संगीत मैं यह जो
यहाँ हूँ।
मृत्यु को
मृत्यु का आलोक जीवन को
जीवन का ओ जीवन! ओ मरण! ओ वृन्द-वाद्य!
हम गाते हैं
जहाँ हैं! साथ दो!

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