मैं दीप हूँ-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

मैं दीप हूँ-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

मैं दीप हूँ,
मैं हमेशा जलता हूँ
यूँ ही जलते जलते मैं
तम का विनाश करता हूँ।

मैं दीप हूँ,
ना मैं कभी पिघलता हूँ
बुराइयों का अंत करके मैं
हर घर को रोशन करता हूँ।

मैं दीप हूँ,
भटके को राह दिखाता हूँ
निराशा को आशा में बदल
खुशियों की बौछार करता हूँ।

मैं दीप हूँ,
बाती के संग में रहता हूँ
बिन बाती मैं कुछ नहीं
मित्रता का संदेश देता हूँ।।

 

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