मैं तेरे सपनों में आऊँ-अंतर्यात्रा-परंतप मिश्र-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Parantap Mishra

मैं तेरे सपनों में आऊँ-अंतर्यात्रा-परंतप मिश्र-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Parantap Mishra

 

सम्बन्धों की भँवर जाल में,
तुमको मैं किस नाम बुलाऊँ
मुझको जब भी याद करे तू,
मैं तेरे सपनों में आऊँ …
मैं तेरे सपनों में आऊँ …
दुनिया की आपा – धापी में,
याद करूँ, कुछ भूल न जाऊँ
मिलने और बिछड़ने जैसी-
रीत न फिर से अब दुहराऊँ
मैं तेरे सपनों में आऊँ …
पलते गीत मेरे उर में जो,
तेरे होठों से जब, गाऊँ
शब्द-शब्द हो जल की धारा
तेरी आँखों से बह जाऊँ
मैं तेरे सपनों में आऊँ …
जीवन के इस कठिन डगर में
पथिक तुझी को साथ मैं पाऊँ
स्वप्नों की है रीत निराली
तुझमें जागूँ, जब सो जाऊँ
मैं तेरे सपनों में आऊँ …
पीर हृदय की मेरी भोली
तेरी धड़कन से बँध जाऊँ
आना-जाना लगे है फेरा
खुद को खोकर तुझमें पाऊँ
मैं तेरे सपनों में आऊँ …

कौन तके दिनकर का फेरा
तेरी गोद में अब सो जाऊँ
हृदय दीप से अंतिम अर्चन
शायद फिर मैं जाग न पाऊँ
मैं तेरे सपनों में आऊँ …

 

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