मैं तेरे सपने देखूं-कविता-रसूल हमज़ातोव-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rasul Gamzatov(Rasool Hamzatov) 

मैं तेरे सपने देखूं-कविता-रसूल हमज़ातोव-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rasul Gamzatov(Rasool Hamzatov)

बरख़ा बरसे छत्त पर, मैं तेरे सपने देखूं
बर्फ़ गिरे परबत पर, मैं तेरे सपने देखूं
सुबह की नील परी, मैं तेरे सपने देखूं
कोयल धूम मचाये, मैं तेरे सपने देखूं
आये और उड़ जाये, मैं तेरे सपने देखूं
बाग़ों में पत्ते महकें, मैं तेरे सपने देखूं
शबनम के मोती दहकें, मैं तेरे सपने देखूं
इस प्यार में कोई धोखा है
तू नार नहीं कुछ और है शै
वरना क्यों हर एक समय
मैं तेरे सपने देखूं

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