मैं और मेरा दुख-सूर्य का स्वागत -दुष्यंत कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dushyant Kumar

मैं और मेरा दुख-सूर्य का स्वागत -दुष्यंत कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dushyant Kumar

दुख : किसी चिड़िया के अभी जन्मे बच्चे सा
किंतु सुख : तमंचे की गोली जैसा
मुझको लगा है।

आप ही बताएँ
कभी आप ने चलती हुई गोली को चलते,
या अभी जन्मे बच्चे को उड़ते हुए देखा है?

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