मैं ऐसा क्यूं हूं-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

मैं ऐसा क्यूं हूं-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

मैं ऐसा क्यूं हूं, मैं ऐसा क्यूं हूं
मैं जैसा हूं, मैं वैसा क्यूं हूं
करना है क्या मुझको, ये मैंने कब है जाना
लगता है गाऊंगा, ज़िन्दगी भर बस ये गाना
होगा जाने मेरा अब क्या
कोई तो बताए मुझे
गड़बड़ है ये सब क्या
कोई समझाए मुझे
ओ वे ई आय…
मैं ऐसा क्यूं हूं…

अब मुझको ये है करना, अब मुझे वो करना है
आख़िर क्यूं मैं ना जानूं, क्या है कि जो करना है
लगता है अब जो सीधा, कल मुझे लगेगा उल्टा
देखो ना मैं हूं जैसे, बिल्कुल उल्टा-पुल्टा
बदलूंगा मैं अभी क्या
मानूं तो क्या मानूं मैं
सुधारूंगा मैं कभी क्या ये भी तो ना जानूं मैं
जाने अब मेरा होना क्या
लगता है तुमको क्या
जाने अब मेरा होना क्या है
क्या मैं हूं, जैसा बस वैसा रहूंगा
ओ वे ई आय…
करना है क्या मुझको…

(लक्ष्य)

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