मेला सुन शिवरात दा बाबा अचल वटाले आई ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

मेला सुन शिवरात दा बाबा अचल वटाले आई ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

मेला सुन शिवरात दा बाबा अचल वटाले आई ॥
दरशन वेखन कारने सगली उलट पई लोकाई ॥
लगी बरसन लछमी रिध सिध नउ निधि सवाई ॥
जोगी वेख चलित्र नों मन विच रिशक घनेरी खाई ॥
भगतियां पाई भगत आन लोटा जोगी लया छपाई ॥
भगतियां गई भगत बूल लोटे अन्दर सुरत भुलाई ॥
बाबा जानी जान पुरख कढ्या लोटा जहां लुकाई ॥
वेख चलित्र जोगी खुणसाई ॥39॥

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